Hindi / Sanskrit Text
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥ तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई। छाँड़ि दई कुल की कानि, क्या करिहै कोई॥ सन्तन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई। अब तो बात फैल गई, जाने सब कोई॥ भगत देखि राजी हुई, जगत देखि रोई। दासी मीरा लाल गिरधर, तारो अब मोही॥